मोदी को मात देने के लिए, जूनियर पार्टनर बनेंगे अखिलेश

  • Publish Date:
  • June 11, 2018 02:02 PM

केंद्र की मोदी सरकार को 2019 के  लोकसभा चुनाव  में  मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है। और  यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है। गठबंधन को लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम आने लगा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के लिए वह त्याग को तैयार हैं और अगर उन्हें गठबंधन करने के लिए दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे। मैनपुरी में अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन के लिए मायावती के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और त्याग के नाम पर उन्होंने मायावती को बड़े  सांझेदार के तौर पर मंजूर भी कर लिया है। अब  देखना यह है कि अखिलेश यादव के  जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाने के बाद कितनी सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता होता है।

बता दें कि मायावती ने कैराना उपचुनाव के पहले ये साफ कर दिया था कि अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। राजनीतिक तौर पर मायावती के इस बयान को  एक बड़े बयान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें उन्हें बड़ा सांझेदार मानने की एक जिद  थी।

यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी। जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुला था. फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन किया था। इसी का नतीजा था कि भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। और इसके बाद से दोनों पार्टियां के बीच रिश्ते ऐसे मजबूत हुए हैं। कि अखिलेश यादव बसपा का साथ किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है।

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