बेरहमी से क़त्ल के बाद लाश के किये दो टुकड़े

  • Publish Date:
  • February 10, 2018 04:50 PM

सौतेली बेटी का कत्ल करने वाली मां मीनू कौर के दिल में इतनी नफरत थी कि हत्या के बाद भी वह शांत नहीं हुई। बेरहम तरीके से हत्या के बाद मां ने लाश के कमर से दो टुकड़े कर डाले। चार घंटे तक वह लाश को काटती रही। देहरादून के अंसारी रोड (पलटन बाजार) पर सामने आए दिल-दहलाने वाले हत्याकांड में सौतेली मां का वह चेहरा सामने आया है, जो आमतौर पर हॉरर कहानियों में पढ़ने को मिलता है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। जिस युवती की हत्या हुई वह एयर हॉस्टेस का कोर्स कर रही थी। सौतेली मां ने सो रही बेटी प्राप्ति के सिर पर ईंट से हमला कर उसकी हत्या की। पत्थर दिल बनी सौतेली मां का कलेजा इतने से नहीं भरा और उसने फिर खुखरी से बेटी के शव के दो टुकड़े कर दिए। ताकि वह शव को ठिकाने लगा पाए। शव के टुकड़े करने में उसे चार घंटे का वक्त लगा, लेकिन शव को घर से बाहर ले जाने का साहस नहीं जुटा पाई।  सात फरवरी की रात को झगड़े के बाद प्राप्ति बगैर खाना खाए सो गई। मां का गुस्सा बेटी के इस तरह सोने के बाद भी शांत नहीं हुआ। उसने रात एक बजे सोई बेटी के सिर पर ईंट से कई वार किए। इसके बाद शव को उठाकर बाथरूम में डाल दिया। फिर रात में ही खुखरी से शव को काटने लगी और उसने चार घंटे में कमर से शव के दो टुकड़े कर दिए। फिर उसने नई योजना बनाई और बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी। पुलिस की पूछताछ में मीनू कौर ने कहा कि उसे बेटी के कत्ल का कोई अफसोस नहीं है। उसने बार-बार यही बयान दिया कि पहले इसके पिता ने परेशान किया और अब बेटी परेशान कर रही है। इस हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने मौके से ही मीनू कौर को हिरासत में ले लिया था। मौके पर हुई पूछताछ में ही मीनू ने हत्या की बात कबूल ली थी, हालांकि मौके के साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इसके लिए घर के पास लगे सीसीटीवी फुटेज को भी कब्जे में लिया गया है। साथ ही घटना  वाली रात क्या मीनू के साथ कोई और भी इसमें शामिल रहा है। इधर, एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि आरोपी मीनू कौर पूछताछ में एक ही बात को दोहरा रही है कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। मीनू ने पुलिस को बताया कि जिंदगी में उसे कभी सुख नहीं मिला। पहले प्राप्ति को लेकर पति के ताने सुने और तब भी घर में झगड़े होते थे, पति की मौत के बाद प्राप्ति का रवैया भी ठीक नहीं रहता था। हर समय उसने परेशान ही किया, ऐसे में जो हुआ उसे उसका कोई अफसोस नहीं था। 

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