स्वामी चिन्मयानंद हो सकते है गोरखपुर से भाजपा उम्मीदवार

  • Publish Date:
  • February 13, 2018 07:04 PM

ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि विश्व हिन्दू परिषद के सक्रिय नेता और कई बार संसद सदस्य रह चुके देश के पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पुन: जनता के बीच लाना चाहता है। संघ से प्रवीण तोगडिया को फरवरी में विश्व हिन्दू परिषद से हटाने के बाद, स्वामी चिन्मयानंद को उनकी जिम्मेदारी सौंपने पर विचार कर रहा है। योगी आदित्यनाथ भी स्वामी चिन्मयानंद को गोरखपुर चुनाव लड़ाना चाहते हैं।

स्वामी चिन्मयानंद महंत अवैद्यनाथ के खास सखा थे। महंत अवैद्यनाथ जी का स्वामी चिन्मयानंद पर अटूट विश्वास था। वे अपने सारे राजनीतिक फैसले स्वामी चिन्मयानंद की राय से ही लेते थे। योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ाने का सुझाव भी स्वामी चिन्मयानंद ने ही महंत अवैद्यनाथ को दिया था इसीलिए अवैद्यनाथ जी ने जीते जी ही अपनी जगह अपने शिष्य योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ाया और उन्हे गोरखपुर से चुनाव जीताने के लिए काफी परिश्रम किया। अब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और वे चाहते हैं कि स्वामी चिन्मयानंद गोरखपुर का उप चुनाव लड़ें, संसद सदस्य बनें और संघ की तरफ से विश्व हिन्दू परिषद का कार्यभार भी संभालें । संभवत: योगी आदित्यनाथ के लिए स्वामी चिन्मयानंद से अच्छा उम्मीदवार कोई नहीं है।

इस स्थिति में गोरखपुर का चुनाव पुरे देश में सबसे महत्वपूर्ण चुनाव हो जाएगा।  योगी आदित्यनाथ अपनी जगह पर स्वामी चिन्मयानंद को हर हाल में जिताना चाहेंगे, क्योंकि इससे उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा जुड़ी है। इस चुनाव में सरकार का कितना दखल होगा, गोरखपुर की जनता लगातार अपने प्रतिनिधि रहे योगी आदित्यनाथ की इस बार कितनी बात मानती है। इस सब का असर देश की राजनीति पर पड़ेगा। अगर योगी आदित्यनाथ स्वामी चिन्मयानंद को भारी मतों से जीता पाए, तो देश में उनकी काफी जयजयकार होगी और अगर वे स्वामी चिन्मयानंद को नहीं जीता पाए, तो उनकी राजनीतिक उत्कर्ष यात्रा पर ग्रहण लग जाएगा। देखना है गोरखपुर उपचुनाव देश के लिए क्या राजनीतिक संदेश देता है। वहां की जनता का फैसला देश की राजनीति पर बड़ा असर डालेगा।

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