बराबरी का साथ निभाएं, महिलएं अब आगे आएं

  • Publish Date:
  • March 08, 2018 07:04 PM

 

 कोई भी देश यश के शिखर पर तब तक नहीं पहुच सकता, जब तक उसकी महिलाएं कंधे से कंधा मिला कर ना चले

भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- 'यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता: अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। उसे 'भोग की वस्तु'  समझकर आदमी 'अपने तरीके' से 'इस्तेमाल' कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है। लेकिन वर्तमान समय में महिलाओं के साथ इव टीजिंग और सेक्सुअल हैरसमेंट जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही है। राह चलते भद्दे कमेंट्स, अश्लील गाने, ग़लत तरी़के से छूना, अश्लील इशारेये कुछ ऐसी चीज़ें हैं, जिनका सामना छोटे-बड़े शहर की तक़रीबन हर महिला/लड़की को करना पड़ता है। मुमक़िन है आप भी इसकी शिकार हुई हों, लेकिन इस सामाजिक बुराई के प्रति तो क़ानून और ही लोग गंभीर नज़र आते हैं, जिसके चलते ये बुराई समाज में अपनी जड़ें गहराई तक जमाती जा रही है।

8 मार्च यानी आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) है। क्या आप जानते हैं कि पहली बार यह कब मनाया गया था। यह सबसे पहली बार 1909  में मनाया गया था और इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1975 से मनाना शुरू किया।  विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि कैसे महिलाओं ने कई सामाजिक अन्य बाधाओं को पार करते हुए मुकाम हासिल किए और लगातार कर रही हैं। आज की तारीख में हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं लेकिन अतीत में ऐसा नहीं था। जिस प्रकार की आजादी आज हम महिलाओं को प्राप्त हुए देखते हैं, वे पहले नहीं थीं। वे पढ़ पाती थी, नौकरी कर पाती थीं और ही उन्हें वोट डालने की आजादी थी।

अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था,  किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। 

जीवन की कला को अपने हाथों से साकार कर नारी ने सभ्यता और संस्कृति का रूप निखारा है, नारी का अस्तित्व ही सुन्दर जीवन का आधार है

हम सभी जानते है की हमारा भारत देश पूरे विश्व में अपनी अलग रीती रिवाज़ तथा संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। भारत में प्राचीन काल से ही यह परंपरा रही है की यहाँ महिलाओं को समाज में विशिष्ट आदर एवं सम्मान दिया जाता है। भारत वह देश है जहाँ महिलाओं की सुरक्षा और इज्ज़त का खास ख्याल रखा जाता है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है। अगर हम 21वीं सदी की बात करे तो महिलाएं हर कार्यक्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम  रही है चाहे वो राजनीति, बैंक, विद्यालय, खेल, पुलिस, रक्षा क्षेत्र, खुद का कारोबार हो या आसमान में उड़ने की अभिलाषा हो।

परंतु अगर पर्दे के पीछे की सच्चाई कीं बात की जाये तो दफ्तरों, घरों, सड़को आदि जगहों पर महिलाओं पर किये गए अत्याचारों से लोग आज भी अनजान है। पिछले कुछ समय में ही महिलाओं पर तेज़ाब फेंकना, बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसी वारदातों में एका-एक वृद्धि हुई है। इन घटनाओं को देखने के बाद तो लगता है की महिलाओं की सुरक्षा आज भी खतरे में है।

लेकिन लड़कियों को बचाने और शिक्षित करने की भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। अभी ये योजना देश के 161 जिलों में लागू है और अब इसे बढ़ाकर 640 जिलों में किया जाएगा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अहम योजना है। इसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है।

लेकिन सही मायनो में जिस दिन विश्व की महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जब दहेज के लालच में उन्हें जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जब उनके साथ बलात्कार नहीं होगा, जब ना उन्हें बेचा जाएगा और ना ही कन्या भ्रूण हत्या होगी उसी दिन सही मायनों में महिला दिवस सार्थक हो पाएगा।

बराबरी का साथ निभाएं, महिलएं अब आगे आएं.

 

 

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